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” करियाला” पहाड़ी संस्कृति में सामाजिक कुरीतियों के ऊपर व्यग्यात्मक प्रहार

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प्राचीन समय में जब मनोरंजन का कोई साधन नहीं होता था उस समय इस प्रकार के उत्सवों का आयोजन लगभग हर एक गावं में होता रहता था ताकि लोगों को इकट्ठा होने का मौका भी मिले और एक सुसंस्कृत मनोरंजन भी पेश हो। करियाला लग-भग सोलन , शिमला , सिरमौर , बिलासपुर तथा मंडी जिले के कुछ भागों मे प्रसिद्ध था, यदि रियासतों के हिसाब से देखा जाए तो कोटि ,क्योंथल , भज्जी ,बघाट , बाघल , सुकेत , केहलूर में तो यह बहुत आम था। इसके अतिरिक्त हिमाचल प्रदेश के हर एक जिले में इसके लिए विशेष आयोजन होते रहते थे। यदि हम थोड़ा विस्तार से देखें तो यह जान पड़ता है कि यह लग- भग पंजाब में ” अखाड़ा” , राजस्थान में ” तमाशा ” हरियाणा में “स्वांग” के जैसा ही है।साधू स्वांग ( नौ नाथों की टोली ) नट- नटी , लम्बरदार , नेपाली स्वांग , बंगाला स्वांग , सखियों का दरबार , बूढ़ा सेठ , बूबी का स्वांग , डाऊ – डायन इत्यादि।

सायर उत्सव के बाद से ही पहाड़ी इलाकों में करियालों की संख्या बढ़ जाती है किन्तु वैसे शरद ऋतू के आगमन पर इन जगहों पर त्योहारों के रूप में करियाला अधिकतर मनाया जाता है। जब किसी गावं में करियाला होता है तब गावं में घरों के लोग अपने रिश्तेदारों तथा सगे – सम्बन्धियों को दावत देते हैं।

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करियाला भिन-भिन देवस्थानों पर सदियों से होता रहा है किन्तु यह समर्पित है देव राजा बृजेश्वर महाराज को। देव बृजेश्वर महाराज इस परम्परा के आराध्य देव हैं जिनके मंदिर वैसे तो हिमाचल प्रदेश में कई स्थानों पर है किन्तु यहां इनका मुख्यस्थान देवथल में है जोकि सोलन जिला में सपाटू के समीप गम्बरपुल से थोड़ी दूरी पर है। देव राजा बृजेश्वर महाराज ने यह प्रण लिया था कि वह चन्द्रावली को आँगन -आँगन में नचवाएंगे यही कारन है की करियाले में सबसे पहले चन्द्रावली नृत्य पेश किया जाता है और उसी के साथ एक काहन अर्थात कुल्हाड़ी वाला व्यक्ति होता है। इस नृत्य के बिना करियाला अधूरा माना जाता है और कोई दोष न लगे इसलिए बेहद जरूरी भी। जहां पर कभी करियाले का आयोजन किया जाता रहा और बाद मे बंद कर दिया तो उस स्थान पर चन्द्रावली का खोट (दोष ) मिलता है। साधू स्वांग भी इतने ही मायने रखता है। जिस- जिस परिवार के इष्ट देवता बृजेश्वर महाराज है उन्हें अपने ज्येष्ठ पुत्र के विवाह या जन्म पर करियाले का आयोजन करना पड़ता है जो अनिवार्य है। बृजेश्वर महाराज सोलन , सिरमौर तथा शिमला के कुछ इलाकों के मुख्य देवता हैं इनके इतिहास और शक्तियों से भी आपको बहुत जल्द अवगत करवायेंगे।

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